ज्योतिषशास्त्र और एक दृष्टी - Jyotishshastra Ek Drishti ज्योतिषशास्त्र भारतीय मनीषियों के त्याग , तपस्या ,जनित और बुद्धि की देंन है | ज्योतिषशास्त्र दो भागो में हमें ज्ञान प्राप्त करता है इसका का ग णित भाग्य विश्व के मानव के मस्तिष्क की वैज्ञानिक उन्नति की जड़ है और फलित भाग्य उसका फल-फूल है| ज्योतिष अपने विविध भेदों के माध्यम से समाज की सेवा करता आया है| इसने अपने गणित ज्ञान से विश्व को उद्बोधित किया और आकाश में रहने वाले ग्रहों और तारो के बिम्बों,किरणों और प्रभावों का अध्ययन किया | हमारे महर्षियों ने ब्रह्माण्ड रूपी भचक्र में विचरने वाले गगनेचरो को कुंडली के भचक्र के रूप में साक्षातकार कर उसके मध्याम से जनजीवन पर पड़ने वाले उनके प्रभावो का विस्श्लेषण किया | जिसे “फलित ज्योतिष” कहा जाता है |विश्व के शुभाशुभ फलो को दर्शाने वाला शास्त्र “ज्योतिषशास्त्र ” कहलाता है ¬– "प्रयोजनम तु जगतः शुभाशुभ निरुपणं |" अर्थात-👉“प्राणियों या वस्तुओ पर ग्रहों का प्रभाव पड़ता है फलतः उसके शुभाशुभो पर प्रभावित करता है दूसरा मत है की प्राणियों के पूरब जन्म कृत शुभाशुभ कार्यो से ग्रह आबध होता है ...
पराशर ज्योतिष - Parashara Jyotish
मैं सुनील नाथ झा, एक ज्योतिषी, अंकशास्त्री, हस्तरेखा विशेषज्ञ, वास्तुकार और व्याख्याता हूं। मैं 1998 से ज्योतिष, अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तुकला की शिक्षा और अभ्यास कर रहा हूं | मैंने राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान तथा लखनऊ विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य | मैंने वास्तुकला और ज्योतिष नाम से संबंधित दो पुस्तकें लिखी हैं -जिनके नाम "वास्तुरहस्यम्" और " ज्योतिषतत्त्वविमर्श" हैं | मैंने दो पुस्तकों का संपादन किया है - "संस्कृत व्याकर-सारः" और "ललितासहस्रनाम" |