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ब्रह्मांड का सबसे बड़ा रहस्य! श्रीमद भगवद गीता अध्याय 15: पुरुषोत्तम योग (Bhagavad Gita Ch 15)

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प्रश्न कुण्डली (Horary Astrology): जीवन के हर अनसुलझे सवाल का सटीक ज्योतिषीय समाधान

प्रश्नाध्याय – प्रश्न कुण्डली (Prashna Kundali): अचूक ज्योतिषीय रहस्य भावैर्विचार्य विषयान् जानीयात् प्राग् बुधस्ततः | बलाऽबलविवेकेन शुभाऽशुभफलं दिशेत् || स्वरुपलक्षणं प्रश्न- कर्तुर्दुःखसुखे तनोः | रत्नाना लाभहानी तु धनस्थानात् विचिन्तयेत् || ज्योतिषशास्त्र पुराण गणकैरादेश इत्युच्यते अर्थात् ज्योतिषशास्त्र ज्ञान का आदेशात्मक शास्त्र है। मानव स्वभाव से ही जिज्ञासु होता है। वह अपने वर्तमान एवं भविष्य से सम्बन्धित प्रश्नों का उत्तर जानना चाहता है तथा उसके समाधान के लिए ज्योतिष की सहायता चाहता है। अतः ज्योतिषियों को प्रश्नों का फलादेश करने से पहले जातक को पहचान ले कहीं प्रश्न कर्ता ठग, शठ, नास्तिक और निंदक हो तो उसके समझ इस शास्त्र का ज्ञान प्रकाशित नहीं करना चाहिए। जो श्रद्धावान् हो तो उसको प्रश्नों को उत्तरित करना चाहिए। प्रश्न कर्ता अंग स्पर्श करते हुए प्रश्न करता हो तो उसके शुभाशुभ का निर्णय लेना चाहिए और अभीष्ट सिद्धि होती है। ✍️ लेखक परिचय: डॉ. सुनील नाथ झा डॉ. सुनील नाथ झा...

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