प्रश्नाध्याय – प्रश्न कुण्डली (Prashna Kundali): अचूक ज्योतिषीय रहस्य भावैर्विचार्य विषयान् जानीयात् प्राग् बुधस्ततः | बलाऽबलविवेकेन शुभाऽशुभफलं दिशेत् || स्वरुपलक्षणं प्रश्न- कर्तुर्दुःखसुखे तनोः | रत्नाना लाभहानी तु धनस्थानात् विचिन्तयेत् || ज्योतिषशास्त्र पुराण गणकैरादेश इत्युच्यते अर्थात् ज्योतिषशास्त्र ज्ञान का आदेशात्मक शास्त्र है। मानव स्वभाव से ही जिज्ञासु होता है। वह अपने वर्तमान एवं भविष्य से सम्बन्धित प्रश्नों का उत्तर जानना चाहता है तथा उसके समाधान के लिए ज्योतिष की सहायता चाहता है। अतः ज्योतिषियों को प्रश्नों का फलादेश करने से पहले जातक को पहचान ले कहीं प्रश्न कर्ता ठग, शठ, नास्तिक और निंदक हो तो उसके समझ इस शास्त्र का ज्ञान प्रकाशित नहीं करना चाहिए। जो श्रद्धावान् हो तो उसको प्रश्नों को उत्तरित करना चाहिए। प्रश्न कर्ता अंग स्पर्श करते हुए प्रश्न करता हो तो उसके शुभाशुभ का निर्णय लेना चाहिए और अभीष्ट सिद्धि होती है। ✍️ लेखक परिचय: डॉ. सुनील नाथ झा डॉ. सुनील नाथ झा...
पराशर ज्योतिष - Parashara Jyotish
मैं सुनील नाथ झा, एक ज्योतिषी, अंकशास्त्री, हस्तरेखा विशेषज्ञ, वास्तुकार और व्याख्याता हूं। मैं 1998 से ज्योतिष, अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तुकला की शिक्षा और अभ्यास कर रहा हूं | मैंने राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान तथा लखनऊ विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य | मैंने वास्तुकला और ज्योतिष नाम से संबंधित दो पुस्तकें लिखी हैं -जिनके नाम "वास्तुरहस्यम्" और " ज्योतिषतत्त्वविमर्श" हैं | मैंने दो पुस्तकों का संपादन किया है - "संस्कृत व्याकर-सारः" और "ललितासहस्रनाम" |