चित्र १: राशि चक्र – जहाँ वैदिक ज्ञान और खगोलीय विज्ञान का संगम होता है। १. प्रस्तावना (Introduction) भारतीय ज्योतिष शास्त्र , जिसे वेदांग ज्योतिष के नाम से भी जाना जाता है, वेदों का नेत्र माना गया है। इस शास्त्र का मुख्य उद्देश्य काल (समय) और दिक (स्थान) के अंतर्संबंधों का अध्ययन कर मानव जीवन पर पड़ने वाले ब्रह्मांडीय प्रभावों का विश्लेषण करना है। इस विश्लेषण की आधारशिला 'राशि' (Rashi) है। संस्कृत भाषा में 'राशि' शब्द का व्युत्पत्तिपरक अर्थ 'समूह', 'ढेर' या 'पुंज' होता है। खगोलीय दृष्टिकोण से, यह भचक्र (Zodiac) का एक निर्दिष्ट खंड है, जबकि फलित ज्योतिष के दृष्टिकोण से, यह प्रारब्ध और संचित कर्मों का एक 'कोश' (Repository) है। जब एक जिज्ञासु प्रश्न करता है कि "राशि क्या है?", तो इसका उत्तर मात्र 'मेष' या 'वृष' जैसे नामों तक सीमित नहीं रह जाता। यह प्रश्न हमें ब्रह्मांड की ज्यामिति, नक्षत्रों की ऊर्जा, और कालपुरुष (Cosmic Being) के शरीर ...
पराशर ज्योतिष - Parashara Jyotish
मैं सुनील नाथ झा, एक ज्योतिषी, अंकशास्त्री, हस्तरेखा विशेषज्ञ, वास्तुकार और व्याख्याता हूं। मैं 1998 से ज्योतिष, अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, वास्तुकला की शिक्षा और अभ्यास कर रहा हूं | मैंने राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान तथा लखनऊ विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य | मैंने वास्तुकला और ज्योतिष नाम से संबंधित दो पुस्तकें लिखी हैं -जिनके नाम "वास्तुरहस्यम्" और " ज्योतिषतत्त्वविमर्श" हैं | मैंने दो पुस्तकों का संपादन किया है - "संस्कृत व्याकर-सारः" और "ललितासहस्रनाम" |